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| Ebola Virus |
ईबोला वायरस पहली बार अफ्रीकी देश, सूडान से दर्ज किया गया था। धीरे-धीरे यह वायरस इन्फेक्शन दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक बन गया है। इस वायरस के नुकसान बहुत अधिक हैं और इस वायरस से पीड़ित लगभग 80% लोगों की मृत्यु हो गई है। आपको यह जान लेना चाहिए कि यह वायरस दुनिया भर के लाखों लोगों को संक्रमित (इन्फेक्टेड) करने की क्षमता रखता है।
आखिर यह वायरस है क्या
पहले ईबोला वायरस रोगों को ईबोला हेमरेहैग्जिक फिवर के नाम से जाना जाता था। इसे एक ऐसी बीमारी के रूप में जाना जाता था जो जानवरों से मनुष्यों तक फैल जाती थी। आरएनए वायरस, जंगली जानवरों जैसे कि गोरिल्ला, बंदरों, चिंपांजियों और फल के चमड़े को संक्रमित (इन्फेक्टेड) करता है और ये मनुष्य के लिए भी फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह रोग शरीर के तरल पदार्थ जैसे रक्त, स्राव और संक्रमित (इन्फेक्टेड) जानवर या व्यक्ति के अंगों के साथ सीधे संपर्क के माध्यम से होता है।
इसके प्रारम्भिक लक्षण क्या-क्या हैं
प्रारंभिक लक्षण में वायरस आपके शरीर को संक्रमित (इन्फेक्टेड) करने के बाद एक हफ्ते में प्रकट हो सकते हैं। इस वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद सिरदर्द, बुखार, चकत्ते, मतली, पेट दर्द, उल्टी, शरीर में दर्द, खाँसी होने लगती है। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान करना मुश्किल है क्योंकि प्रारंभिक लक्षण अन्य बीमारियों के लक्षणों के समान हैं। इसकी डायग्नोसिस आमतौर पर वायरल डीएनए और ईबोला के प्रति एंटीबॉडी के टेस्ट्स के आधार पर किया जाता है।
प्रारंभिक लक्षण में वायरस आपके शरीर को संक्रमित (इन्फेक्टेड) करने के बाद एक हफ्ते में प्रकट हो सकते हैं। इस वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद सिरदर्द, बुखार, चकत्ते, मतली, पेट दर्द, उल्टी, शरीर में दर्द, खाँसी होने लगती है। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान करना मुश्किल है क्योंकि प्रारंभिक लक्षण अन्य बीमारियों के लक्षणों के समान हैं। इसकी डायग्नोसिस आमतौर पर वायरल डीएनए और ईबोला के प्रति एंटीबॉडी के टेस्ट्स के आधार पर किया जाता है।
बाद के लक्षण
ऊपर के सारे लक्षण के बाद रोगियों में कुछ दिनों के भीतर ही बाद के कई लक्षण दिखाई देते हैं। इसमे दिखाए देने वाले लक्षणों में रोगियों का लिवर खराब हो जाता है, किडनी ठीक से काम करना बंद कर देती है, शरीर के भीतर और बाहर ब्लड आने लगता है, उल्टी के समय ब्लड आत है, दस्त होना और दस्त में भी ब्लड आना और आंखे अधिक लाल हो जाना आदि आते हैं जो अंत में मौत का कारण बन जाते हैं।
किन लोगों को इस इन्फेक्शन की अधिक संभावना है
रिसर्च के अनुसार यह देखा गया है कि जिन लोगों को ईबोला इन्फेक्शन अधिक मात्रा में हुई है वह व्यक्ति या फिर उसके परिवार का कोई सदस्य हेल्थ वर्कर हैं। हेल्थ वर्कर से मतलब ऐसे वर्कर जो जो मृत व्यक्ति के साथ संपर्क में रहते हैं जैसे पोस्टमार्टम और मुर्दाघर या श्मशान आदि। ऐसे व्यक्ति जो मांस का कारोबार करते हैं या फिर किसी संक्रमित (इन्फेक्टेड) जानवार के संपर्क में रहते हैं वे और उनके परिवार का सदस्य भी इस रोग का पीड़ित बन सकता है।
ईबोला और विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन)
वर्ल्ड हेल्थ ने ऑर्गनाइजेशन ने ईबोला वायरस के लिए काफी रिसर्च की है। उनके रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार इस वायरस से मृत्यु होने का खतरा काफी अधिक है। उनका मानना है कि इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति को बहुत अधिक मात्रा में दर्द और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी तक इस वायरस के फैलने में कुल 1,711 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 932 लोग इस वायरस के कारण मर चुके हैं। यह सारी मौत अफ्रीका में हुई है और संभावना है कि हाल के महीनों में अफ्रीका का दौरा करने वाले विदेशी नागरिक भी इस घातक वायरस का वाहक हो सकते हैं।
ईबोला को रोकने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है
ईबोला इन्फेक्शन को रोकने के लिए अभी तक मनुष्यों पर किसी तरह का टेस्ट नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि कोई व्यक्ति इस ईबोला वायरस के इंजेक्शन को लेने के लिए तैयार नहीं। जब कोई इसे लेने को तैयार नहीं है तो इस बात का भी पता नहीं लगाया जा सकता है कि क्या यह वायरस एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रभावित करता है या नहीं। अब तक के विकसित किए गए इंजेक्शन जानवरों में ईबोला इन्फेक्शन को रोकने में बहुत प्रभावी हैं। लेकिन इन्सानो के लिए अभी तक कोई भी इंजेक्शन नहीं बन पाई है।
ईबोला से शरीर का कौन सा भाग प्रभावित होता है
ईबोला वायरस को सिर्फ एक कोशिका में जाने की जरूरत भर है। इसके बाद यह वायरस खुद ही एक कोशिका से एक लाख कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है। इसके लिए उसे किसी विशेष प्रकार के सेल की कोई जरूरत नहीं है, यह शरीर के किसी भी सेल से आरंभ हो सकता है। यह वायरस शरीर की हड्डियों और कंकाल की मांसपेशियों को छोड़कर, लगभग सभी हिस्सों को संक्रमित (इन्फेक्टेड) करता है।
बचने के उपाय
ईबोला रोगियों के इलाज के साथ जुड़े लोग ईबोला इन्फेक्शन से दूर रहें।
स्वास्थ्य कर्मचारी जब ईबोला से प्रभावित जगहों पर की यात्रा करते हैं और साथ ही साथ ईबोला रोगियों का इलाज भी करते हैं तो उन्हे डब्ल्यूएचओ द्वारा तय की गई गइडलाइन का पालन करना चाहिए।
ईबोला से संक्रमित (इन्फेक्टेड) देशों में जाने पर यात्रियों के लिए सावधानी बरतना जरूरी है।
आपको उन रोगियों के संपर्क में नहीं आना चाहिए जो ईबोला रोग से प्रभावित हुए हैं।
यदि आप उन इलाकों में रहते हैं जहाँ ईबोला की रिपोर्ट हो रही है, तो आपको इस बीमारी से जुड़े लक्षणों के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ होना चाहिए।
यदि आपको ऐसा कोई लक्षण लगता है, तो आपको तत्काल चिकित्सा ध्यान लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
यदि आप पश्चिम अफ्रीका के किसी व्यक्ति से खाँसी, बुखार और उल्टी के लक्षणों के साथ घनिष्ठ संपर्क में आते हैं, तो आप के लिए तत्काल चिकित्सा ध्यान तलाशना उचित है।
वायरस से प्रभावित देश
वर्तमान समय में ईबोला वायरस फैलाने का सबसे बड़ा प्रकोप मुख्य रूप से पश्चिम अफ्रीका तक ही सीमित है। गिनी, सिएरा लियोन, नाइजीरिया और लीबिया जैसे अफ्रीकी देशों ने अगस्त 2014 तक ईबोला के 1600 से ज्यादा मामलों की सूचना दी है। अमेरिकी नियंत्रण केंद्र रोग नियंत्रण और रोकथाम इन पश्चिम अफ़्रीकी देशों के सभी "अनावश्यक" यात्रा से बचने की सलाह देते हैं।

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